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लोगों से ना' कहना भी सीखिए जनाब

बेहतर होगा आप लोगों से ना करना अथवा कहना सीख लें, इससे आपकी अनेक तकलीफें अपने आप खत्म हो जाएंगी। अक्सर आप लोगों से ना कहने में कतराते हैं। आप किसी काम के लिए मना करने से इसलिए बचते हैं, क्योंकि ऐसा कहने की आपमें हिम्मत नहीं होती- कहीं सामने वाला बुरा न मान जाए या मेरा कहीं बड़ा नुकसान न हो जाए, पर जरा विचार कीजिए इसके बदले में आप अपना ज्यादा नुकसान कर लेते हैं, क्योंकि व्यक्तियों द्वारा दिए सभी काम आपके वश में नहीं हैं, पर्याप्त समय उस कार्य को करने के लिए नहीं है या फिर आप उस कार्य को करना नहीं चाहते, लेकिन आपने सामने वाले व्यक्ति के साथ अच्छे संबंध के चलते उसके लिए हामी भरी थी। बेहतर होगा कि आप लोगों से ना कहना सीख लें, इससे आपकी अनेक तकलीफें आपकी क्षमता नहीं है, आपके | जीने की खत्म हो जाएंगी।  शुरू-शुरू में लोग इस बात का बुरा मान सकते हैं, पर यह उससे कहीं बेहतर है कि काम लेकर ना कहा जाए अथवा टालमटोल किया जाए। ना कहना आपके दढ़ चरित्र का प्रतीक है और इसी तरह इसे न कह पाना कमजोर चरित्र का। ना कहने की शुरुआत उन छोटी- छोटी बातों को मना करके कीजिए, जिसके कारण सामने वाले व्य...

सार्थक जीवन के लिए हृदय को पवित्र बनाए

छोटी-छोटी तकलीफो की वजह से हर चिंता में मत पड़े रहो। धैर्य रखो, यही मौलिक शक्तिदायक औषधि है। जो कुछ तुम खाते हो, जो कुछ तुम देखते हो, कुछ सुनते हो और जो इंद्रियों द्वारा ग्रहण करते वह सब तुम्हारे स्वास्थ्य को प्रभावित करता है बाहरी जगत से तुममें तीन प्रकार की प्रतिक्रियाएं होती हैं तन प्रकार के मनुष्य होते हैं, जिनमें एक प्रतिक्रिया की अपेक्ष दूसरी प्रबल रहती है।  जिस प्रकार रुई जिस चीज में भ इसे डुबोया जाता है उसे वह अपने में सोख लेती है। पत्थर, जिस पर किसी प्रकार का प्रभाव नहीं होता तथा मक्खन, जो दूसरों के संसर्ग में बदलता रहता है, चाहे हल्की ऊष्णता ही क्यों न हो। मक्खन के प्रकार के मनुष्य दूसरों के सुखों या दुखों में सहानुभूति से तत्काल द्रवित हो जाते हैं।  इसलिए मैं कहता हूं कि छोटी-छोटी तकलीफों की वजह से मानसिक रोगियों के समान हमेशा चिंता में मत पड़े रहो। धैर्य रखो, यही मौलिक शक्तिदायक औषधि है, समय से पहले हार मत माना।  लंबा जीवन ही सब कुछ नहीं, यदि तुम और, और जीते रहो तो एक समय आएगा कि तुम प्रभु से प्रार्थना करोगे कि वह तुम्हें उठा ले तथा इस दुख का...

असफलता में ही सफलता निहित होती है : Learn by Mistake in Motivation Story in Hindi

सीमा से परे कृुछ करने में भले पहले नाकामी मिले, लेकिन वह सफलता की ओर बढ़ा कदम होता है। आ में से कितने लोगों ने भारोतोलन प्रतियोगिता देखी है? एक महत्वपूर्ण बात जो आप सभी ने देखी होगी वह यह है कि प्रत्येक भारोत्तोलक अपनी ज्ञात क्षमता से कुछ किलोग्राम अधिक बजन उठाने की कोशिश करता है।  जहां अधिकांश अपनी इस कोशिश में कामयाब हो जाते हैं, वहीं कुछ के हिस्से में नाकामी भी आती है। यह अलग बात है कि इस नाकामी से उन्हें कोई शिकवा नहीं होता।  कारण, उन्हें अपनी क्षमता से परे जाकर प्रयास करने का संतोष अधिक होता है। इसके उलट अधिकांश मामलों में हम अपनी सीमाओं के भीतर काम करते हैं शायद ही हम कभी अपनी सीमा से परे जाकर कुछ करने की कोशिश करते हों।  इस तरह हम अपने आप को एक मानसिक बंधन में जकड़ लेते हैं और मानने लगते हैं कि परंपरागत लक्ष्यों को ही हम हासिल कर सकते हैं। एक लीडर होने के  लीडरशिप मंत्र  नाते जरूरी है कि हम पूर्व निर्धारित लक्ष्य से परे एक अतिरिक्त कदम और उठाएं।   एक बार जब आप अंतिरिक्त कदम उठाएंगे तो आपका सामना किसी न किसी सुखद आश्...

Thaan Lene Se Hee Milatee Hai Saphalata | Success Mantras in Hindi

कुछ भी पाने के लिए लगातार प्रयास करते रहना और लक्ष्य को पाने की जिद पालना जरूरी है। तिहास हमें यह बताता है कि हर जीत के पहले एक संघर्ष होता है। चाहे वह संघर्ष हमारी आजादी का हो या अमेरिका की या फिर वह सिकंदर महान की विजय गाथा हो, कोई भी बड़ी सफलता आसानी से नहीं मिलती। भारत में भी आजादी की पहली जंग का शंखनाद 1857 में फूंका गया था, लेकिन आजादी मिली पूरे 90 साल बाद यानी 1947 में। समझने बात यह है कि कुछ भी पाने के लिए लगातार यास करते रहना और पाने की जिद पालना बहुत जरूरी है।  इतिहास में सिकंदर की भारत विजय गाथा में राजा पोरस के साथ हुई उसकी लड़ाई इसका एक उदाहरण है। सिंधु की लड़ाई उन अंतिम लड़ाइयों में थी जो सिकंदर ने लड़ी थीं। इस लड़ाई में पोरस  के पास पचास हाथी थे और सिकंदर के पास घोड़ों की सेना थी और घोड़े हाथियों को देख कर भागने लगते थे। फिर सिंधु नदी अपने आप में एक चुनौतीपूर्ण कठिनाई थी, क्योंकि घोड़े पर बैठकर अपने हथियार और ढाल से सुज्जजित सैनिकों के लिए इसको पार करना मुश्किल था।  और, इसके दूसरी ओर पोरस के सैनिक घात में बैठे थे। इस मुसीबत पर विजय पाने के ल...

Behind a True Story Never Give Up - Inspirational Story of Abraham Lincoln

हमारे सपने तो बड़े-बड़े होते हैं किंतु उनको साकार करने के लिए हम न तो कठोर श्रअम करते हैं, न समय देते हैं और न ही हम में सब्र होता है। कोशिश करते हो, फिर भी सफलता नहीं मिलती तो निराश मत होओ करन उस व्यक्ति को याद करो  जिसने 21साल की उम्र में बार्ड मेंबर का चुनाव लड़ा और हार गया। 22वें वर्ष में शादी की, पर असफल रहा। 24वें वर्ष में व्यवसाय करना चाहा, फिर नाकाम रहा। 27वें वर्ष में पत्नी ने तलाक दे दिया। 32वें वर्ष में सांसद पद के लिए खड़ा हुआ, पर मात खा गया।  37वें वर्ष में कांग्रेस की सीनेट के लिए खड़ा हुआ, किंतु हार गया । 42वें वर्ष में फिर सांसद पद के लिए खड़ा हुआ और फिर हार गया। 47वें वर्ष में उपराष्ट्रपति पद के लिए खड़ा हुआ, पर परास्त हो गया, लेकिन वही व्यक्ति 51 वर्ष की उम्र में अमेरिका का राष्ट्रपति बना। नाम था- अब्राहम लिंकन। हिम्मत मत हारो, नए सिरे से फिर यात्रा शुरू करी, कामवानी जरूर मिलेगी। प्रयत्न और पुरुषार्थ सीखना है तो चींटी से सीखो। चींटी अपने से पांच गुना वजन लेकर दस बार दीवार पर चढ़ती है, गिरती है।  चढ़ती है, गिरती है। मगर हिम्मत नहीं हारत...