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जितनी दिखती है उतनी बड़ी होती नहीं मुश्किल Motivation Story in Hindi | Must Read Beautiful Story in Hindi

बाधाएं सिर्फ मानसिक होती हैं। इन्हें हल करने का अपने मन में ठानते ही आप होने लगते हैं कामयाब। हर एक के जीवन में बाधाएं आती हैं। वे काल्पनिक नहीं हैं, परंतु दरअसल वे उतनी कठिन भी नहीं हैं जितनी कि वे दिखती हैं। आपका नजरिया सबसे महत्वपूर्ण तथ्य है। विश्वास करें कि ईश्वर ने आपमें वह शक्ति दी है किं आप आपने आपको किसी मुश्किल परिस्थिति से ऊपर उठा सकें, बशर्ते आप अपनी निगाहें अपनी शक्ति के स्रोत पर गड़ाए रहें।  अपने आपसे दृढ़ता से कहते रहें कि इस शक्ति के माध्यम से आप वह सब कुछ कर सकते हैं जो आप करना चाहते हैं। विश्वास रखें कि यह शक्ति सारे तनाव को आपके शरीर से बाहर निकाल रही है और आपके शरीर में प्रवाहित हो रही है। इस पर विश्वास करें, विजय का अहसास आपको अवश्य होगा। उस बाधा पर एक और नजर डालें, जो आपको परेशान कर रही है।  आप पाएंगे कि यह उतनी विराट नहीं है, जितना आपने सोचा था। खुद से कहें- 'मुश्किल सिर्फ मानसिक होती है। मैं विजय के बारे में सोचता हूं, मुझे विजय अवश्य मिलेगी। इस फार्मूले को याद रखें। इसे एक कागज के टुकड़े पर लिखकर अपने पर्स में रख लें, अपने शीशे पर ल...

प्रतिबद्ध मन को कुछ नहीं सूझता काम के सिवाय ;- Motivation Story in Hindi

प्रतिबद्धता का भाव आपके पूरे चरित्र को बदलकर रख देगा। आपको अंदर और बाहर से बेहद अनुशासित और व्यवस्थित कर देगा। वार के उन्हीं हिस्सों में कीड़े-मकोड़ों का निवास होता है जहां छेट होते हैं और वहीं से दीवार के गिरने की शुरुआत होती है। जिस जगह बांध सबसे कमजोर होता है, बहीं से पानी रिसता है, जो बाद में बांध टूटने का कारण बनता है। अगर किसी घर में सांप या चूहे को घुसना है, तो वह वहां से घुस पाएगा जहां से घुसने के लिए उसे थोड़ी सी जगह मिल पाएगी।  दीवार पर बन गए एक छेद या बांध के कमजोर हिस्से या मकान में हो गए एक छिद्र की तरह ही प्रतिबद्धता की कमी भी है, जो निश्चित रूप से हमारी अपनी कमजोरी का कारण बनता है। इस कमजोरी के लिए पूरी तरह हम ही जिम्मेदार होते हैं। एक प्रतिबद्ध मन कर्म के सिवाय और कुछ सोचता ही नहीं। वह कर्म से भागने के तरीके तो सोचेगा ही नहीं। यदि वह कुछ सोचेगा भी, तो सिर्फ यही कि कर्म को कैसे और अधिक सरल, अधिक उपयोगी बनाया जाए, ताकि सफलता मिल सके।  प्रतिबद्ध होना सीखिए। बड़ी चीजों के प्रति बाद में, छोटी-छोटी चीजों के प्रति पहले। ये छोटी-छोटी प्रतिबद्धताएं ही ...

ग्राहक सेवा है तरक्की का आधार Motivation Story in Hindi

ग्राहक सेवा है तरक्की का आधार  ग्राहक हमेशा वहीं जाना पसंद करता है जहां उसे बेहतर सेवा तथा संतुष्टि मिल सके। ग्रा आपको खुश रखना चाहिए जिससे वह आपको तरक्की दिलाने में मदद करेगा और यदि आप उसे अप्रसन्न कर देंगे, तो वह आपको खारिज कर देगा। हर बात इस एक ऐसा बॉस है, जिसे हक पर निर्भर करती है कि आप अपने बॉस यानी ग्राहक से कैसा व्यवहार करते हैं?  एक महान नियम- हमारी जिंदगी में हमारे कर्मों के अनुसार ही हमें फल मिलेगा। हमारी पूरी जिंदगी, चाहे वह व्यावसायिक हो या व्यक्तिगत, इस नियम के आधार पर चलती है। अतः बिजनेसमैन के लिए कस्टमर की सेवा ही सर्वोपरि है। ग्राहक हमेशा वहीं जाना पसंद करता है जहां उसे बेहतर सेवा तथा संतुष्टि मिल सके और इसके लिए उसे किसी को कोई कारण बताने की आवश्यकता भी नहीं है।  पैसा उसका है वह जैसी म्जी चाहे या जिस तरीके से चाहे उसे खर्च कर सकता है। इसलिए ग्राहक को सर्वोत्तम सेवा देना बहुत जरूरी है ताकि ग्राहक उन्हीं के पास दोबारा आता रहे। - ग्राहक नहीं चाहते कि आप उनसे वक्त और पैसे के बारे में ज्यादती करें। जब एक ग्राहक आपसे कुछ खरीदता है। तो वह आप में ...

बिजनेस में सफलता के रास्ते अनेक - Business Mantra in Hindi

बिजनेस में सफलता के रास्ते अनेक  जोनाथन जॉनसन ने अपने बचपन के दिनों मे रिचमांड (वर्जीनिया ) अमेरिका मे रहते हुए देखा था की उनके पडोसी अपने घरो और समुदाय के कामो मे कितना अभिमान महसूस करते थे ।  लेकिन आज वह पड़ोस आर्थिक बदहाली , अपराध और मादक पढाथो के गोरखधंदो की खौफनाक दासतां बया करते है । जॉनसन ने वर्ष 1992 मे अपना कम्युनिटी प्राइड फ़ूड स्टोर शुरू किया । इसका मकसद था शहर के अंदर लोगो मे अपनी कम्युनिटी को लेकर एक नई भावन का पादुर्भाव करना । रिचमांड शहर मे कम्युनिटी प्राइड के कुल 6 साफ़ सुथरे और सुवाथतहिता स्टोर है । ।  यहां पर लोगों को सही कीमत पर गुणवत्तापूर्ण प्रोडक्ट मिलते हैं इसके ৪০ फीसदी कर्मचारी स्टोर के 3 मील के दायरे में ही रहते हैं। हर स्टोर के पास दो वैन हैं। इसकी सेवा ऐसे ग्राहकों की मिलती है, जो कि इध्वर-ठधर आ-जा नहीं सते । ग्राहकों को चेक कैश कराने, यृटिलिटी बिलों का भुगतान करने, बस के टिकट, पोस्टेज स्टेंप खरीदने और मनी ऑर्डर करने की सुविधा स्टोर में ही उपलब्ध है।जॉनसन शिक्षा पर बेहद जोर देते हैं। कर्मचारियों को विशिष्ट किस्म के प्रशिक्ष...

Avasar Kee Kamee Nahin Jootat Hai Use Pahachaanane Kee - Business Management Story

धन कमाने के अवसर हमारे आसपास वहुतायत में मौजूद होते हैं, बस जरूरत उन्हें पहवान कर अक्ल से सही इस्तेमाल की है। एक गांव में रहने वाले निर्धन मजदूर माता-पिता का इकलीता वेटा गोपाल जाव बड़ा हुआ, ट पैसा कमाने शहर चला गया। कुछ दिन त कहा काम नहीं मिला और भूखों मरने की नीवत आ गई। इसी समय गोपाल उदास् हो एक बीचे में बैठा था। कहां उसे एक मरा हुआ चूहा दिखाई दिवा उसके दिमाग में कुछ सूझा। उसने चूहे को एक बिल्ली के मालिक को बेच दिया।  प्राप्त धन से उसने एक बड़ा मटका और दो गिलास खरीदे। मटके में पानी भरकर उसने खेतों में काम करने वाले किसानों की प्यास बझाई। बदले में उनसे कुछ नहीं लिया। उसको भटाई को देखकर किसानों ने खुश होकर उसे अपने खेतों में उगने वाले फूल ले जाने की इजाजत दे दी। खाली मटेको मे फूल भरकर उहुने मंदिर मे बेच दिया, जिससे उसे काफी धन मिला। रोज यहा क्रम चलता रहा और गोपाल कमाई करता गया। फिर एक दिन जोरदार बारिश में जगल में टूटी साल व सागवान की लकड़ियों को इकट्ठा कर बाजार में बेच दिया। इससे गोपाल को मोटी धनराशि प्राप्त हुई क्योंकि साल व सागवान काफी ऊंचे दामों पर विकती है।  ए...

Turant Ka Jaadoo KItana Anishchit Hai - Life Management in Hindi - Motivation Story in Hindi

आप अपनी जिंदगी में किसी दात का असर तुरंत चाहते हैं तो जाहिर है कि यह उसे तुरंत करने से ही होगा।   पिछले कुछ महीनों से मेरी जिंदगी में सुकून लाने और मेरे कामों को तेजी से पूरा करने में इस मंत्र का जबर्दस्त हाथ रहा है। बार-बार प्रयोग करने के बाद अब जबकि मैं इस बारे में पूरी तरह आश्यस्त हो गया हूं तो मुझे लगा कि यह बात अपने प्रिय पाठकों के साथ शेयर करनी चाहिए। किसी की भी जिंदगी में जादू की तरह असर करने वाला मंत्र है 'तुर्ंत । तुरंत यानी तत्काल या इमीडिएट। यदि आप अपनी जिंदगी में किसी भी बात का असर तुरंत चाहते हैं तो जाहिर है कि वह उसे तुति करते से ही होगा।  यदि आप इस कान को थोड्ी देर के लिए या कल के लिए स्थगित करेंगे तो ठसका असर भी थोड़ी देर या कल तक के लिए स्थगित हो जाएगा। यह भी हो सकता है कि इस स्थगन के कारण काम का असर हमेशा-हमेशा के लिए खत्म ही हो जाए। आप एक बारे इस मत्र की आजनाक देखिए। यदि मजा आए तो करते रहिए अन्यथा छोड़ दीजिए। आजमाना यह है कि आप जिस काम को तुरंत कर रूकते हैं, उसे उसी वक्त कर डालिए। टालिए मत। यहां तक कि थोड़ी सी देर के लिए भी नहीं। मसलन आ...

समस्या का सामना करने से बनती है बात | Samasya Ka Saamana Karane Se Banatee Hai Baat

समस्याओं से भागने से वे आपसे दूर नहीं होतीं, बल्कि दुगने जोर के साथ वापस आती हैं। मैं जब ग्यारहवीं कक्षा में था, तो मुझे अपनी साइंस की किताब खोलना बिलकुल नहीं सुहाता था और मैं हमेशा अपने पसंदीदा विषय गणित में ही लगा रहता था। मुझे गणित के सवाल करना अच्छा लगता था, पर मैंने साइंस के बारे में कभी ध्यान नहीं दिया। जब परीक्षा नजदीक आई, तो मुझे घबराहट होने लगी और मुझे इस विषय की तैयारी के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी।  आप में से बहुत से लोग भी अपनी नापसंद चीजों और समस्याओं से बचने के लिए ऐसा ही कुछ करते होंगे। जब आप समस्याओं से दूर भागते हैं, तो इसका हांगेज यह मतलब नहीं कि वे भी आपसे दूर हो जाती हैं, बल्कि वे तो वापस आकर और ज्यादा ताकत से आपके दरवाजे पर दस्तक देती हैं। मैं साइंस की पढ़ाई से कतराता था, लेकिन परीक्षाएं करीब आने पर मैंने महसूस किया कि महज नापसंदगी के आधार पर मैं इससे बच नहीं सकता।  हमेशा याद रखें:-  (1) समस्याओं से कभी न भागें। कुछ देर शांति से बैठकर विश्लेषण करें कि ऐसा क्यों हुआ और उन चीजों की सूची बनाएं जिनके जरिये इस पर काबू पाया जा सकता है। ...

ज्यादा सोच- विचार से बढ़ती हैं उलझनें ! Jyaada Soch Vichaar Se Badhatee Hain Ulajhanen

किसी कार्य के बारे में बहुत ज्यादा सोचने से यही बेहतर है कि उंस पर काम शुरू कर दिया जाए। बचपन से मुझे लिखने से चिढ़ थी। इसका कारण यह है कि मेरे लेखन माकरण की काफी गलतियां होती, मेरी तबीयत बहुत खराब है। इस वजह से में लिखने में अपना समय और ऊर्जा बर्बाद क्यों करू, लिखने की अपेक्षा बोलकर अपनी बातों को दूसरों तक पहुंचाना ज्यादा सरल है। काफी समय तक ऐसा ही चलता रहा।  आखिर फरवरी 2007 में मेरे गुरु ने भुझे अपने नेतृत्व संबंधी अनुभवों को कागज पर उतारने के लिए मजबूर किया। मैं इसके लिए हिचक रहा था और मैंने न लिखने के लिए उनसे हजार बहाने बनाए. लेकिन गुरु पीछे पड़ गए और उन्होंने मुझे बचने का कोई मौका नहीं दिया। आखिर मैंने अपने विचारों को लेखनबद्ध करना शुरू किया। मेरे लिए लिखना वाकई कठिन था और अपनी मर्जी के बिरुद्ध यह कार्य करने के कारण मैं अक्सर दिमागी उलझन में फंस जाता, लेकिन धीरे-धीरे सब कुछ ठीक होने लगा और मेरे लेखन में प्रवाह आ गया।    इससे मुझे एक महत्वपूर्ण सबक मिला - किसी कार्य के बारे में बहुत ज्यादा सोचने से वही बेहतर है कि उस पर काम शुरू कर दिया जाए।' सोचना ...

सफलता की कुंजी संकल्प शक्ति | Saphalata Kee Kunjee Sankalp Shakti

अच्छे उददेश्यों के पीछे का हठ ही दुढ संकल्प कहलाता है। आधी सफलता संकल्प को दृढ़ता में ही छिपी रहती है। वेसे तो सामान्यतया हठ ठीक नहीं माना जाता लेकिन ग्लानीवश हठ हो और इसकी पूर्ति का उद्देश्य सही हो तो हट भी गुण बन जाता है। राजा उत्तानपाद की टो पत्नियां थीं सुनीति और सुरुचि। इनसे उन्ह दो पुत्र हुए ध्रुव और उत्तम। एक बार राजा सिंहासन पर बैठे थे ठनकी गोद में उत्तम बैठा था तभी ध्रूव बहां आए।  वे भी अपने पिता की गोद में बैठना चाहते थे । यह जानकर ध्रुव की विमाता सुरुचि ने ताना मारते हुए कहा- तुम तपस्या कर मेरी कोख से जन्म लो, तभी राजा की गोद में बैठ सकते हो। इस बात से भ्रुव ने बड़ा अपमानित महसूस किया। उनके पिता राजा उततानपाद रानी सुरुचि को अधिक स्नेह करते थे,  अतः वे भी मौन रहे। धुव ने नारद से प्रेरणा ली और पाँच वर्ष की आयु में यमुनातट पर मधुवन में तपस्या करने लगे। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर विष्णु ने इन्हें बर दिया था, वे सब लोकों, ग्रेहों, नक्षत्रों के ऊपर आधार बनकर स्थित रहेगे। इसालिए उनका स्थान ध्रुबलोक कहलाता है। तपस्या के पश्चात ध्रुव राज्य में लौटे और राज...