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Share Only Your Positive Thoughts - A Beautiful Story in Hindi

सफलता के लिए कोई और योग्यता उतनी महत्वपूर्ण नहीं है, जितनी कि दूसरे लोगों के सामने बोलने, उनका ध्यान खींचने और उन्हें अपने दृष्टिकोण का विश्वास दिलाने की योग्यता । यह संभव है कि कोई व्यक्ति दर्जनों विषयों में पीएचडी की डिग्री ले ले, लेकिन जब तक वह प्रभावी ढंग से अपनी बात दूसरों के सामने नहीं रखेगा, तब तक उसकी इस योग्यता का कोई अर्थ नहीं।  बहरहाल, यह बात तय है कि जब तक आप अपनी बात को सकारात्मक तरीके से व्यक्त करना नहीं सीखते, तब तक अपने क्षेत्र में शिखर तक नहीं पहुंच सकते। प्रभावी ढंग से बोलने की आदत डालने के लिए जरूरी है कि आप जिस भी सभा, समारोह या बैठक में भाग लें उसमें बोलें अवश्य, अपने विचार व्यक्त करें, कोई अनुभव बताएं, किसी तरह से कुछ न कुछ जरूर बोलें।  अपनी टिप्पणियों को पूरे आत्मविश्वास के साथ सकारात्मक तरीके से व्यक्त करें। जो भी बोलें, ईमानदारी से बोलें। अगर आप लोगों को सच बता देते हैं, तो वे आपका समर्थन करेंगे। अगर आप उनसे झूठ बोलते हैं, तो वे आपका साथ छोड़ देंगे।  उम्मीद की. माह जीने की राह आलोचनाओं का सामना सकारात्मक ढंग से करें। यदि आपकी आ...

लोगों से ना' कहना भी सीखिए जनाब

बेहतर होगा आप लोगों से ना करना अथवा कहना सीख लें, इससे आपकी अनेक तकलीफें अपने आप खत्म हो जाएंगी। अक्सर आप लोगों से ना कहने में कतराते हैं। आप किसी काम के लिए मना करने से इसलिए बचते हैं, क्योंकि ऐसा कहने की आपमें हिम्मत नहीं होती- कहीं सामने वाला बुरा न मान जाए या मेरा कहीं बड़ा नुकसान न हो जाए, पर जरा विचार कीजिए इसके बदले में आप अपना ज्यादा नुकसान कर लेते हैं, क्योंकि व्यक्तियों द्वारा दिए सभी काम आपके वश में नहीं हैं, पर्याप्त समय उस कार्य को करने के लिए नहीं है या फिर आप उस कार्य को करना नहीं चाहते, लेकिन आपने सामने वाले व्यक्ति के साथ अच्छे संबंध के चलते उसके लिए हामी भरी थी। बेहतर होगा कि आप लोगों से ना कहना सीख लें, इससे आपकी अनेक तकलीफें आपकी क्षमता नहीं है, आपके | जीने की खत्म हो जाएंगी।  शुरू-शुरू में लोग इस बात का बुरा मान सकते हैं, पर यह उससे कहीं बेहतर है कि काम लेकर ना कहा जाए अथवा टालमटोल किया जाए। ना कहना आपके दढ़ चरित्र का प्रतीक है और इसी तरह इसे न कह पाना कमजोर चरित्र का। ना कहने की शुरुआत उन छोटी- छोटी बातों को मना करके कीजिए, जिसके कारण सामने वाले व्य...

सार्थक जीवन के लिए हृदय को पवित्र बनाए

छोटी-छोटी तकलीफो की वजह से हर चिंता में मत पड़े रहो। धैर्य रखो, यही मौलिक शक्तिदायक औषधि है। जो कुछ तुम खाते हो, जो कुछ तुम देखते हो, कुछ सुनते हो और जो इंद्रियों द्वारा ग्रहण करते वह सब तुम्हारे स्वास्थ्य को प्रभावित करता है बाहरी जगत से तुममें तीन प्रकार की प्रतिक्रियाएं होती हैं तन प्रकार के मनुष्य होते हैं, जिनमें एक प्रतिक्रिया की अपेक्ष दूसरी प्रबल रहती है।  जिस प्रकार रुई जिस चीज में भ इसे डुबोया जाता है उसे वह अपने में सोख लेती है। पत्थर, जिस पर किसी प्रकार का प्रभाव नहीं होता तथा मक्खन, जो दूसरों के संसर्ग में बदलता रहता है, चाहे हल्की ऊष्णता ही क्यों न हो। मक्खन के प्रकार के मनुष्य दूसरों के सुखों या दुखों में सहानुभूति से तत्काल द्रवित हो जाते हैं।  इसलिए मैं कहता हूं कि छोटी-छोटी तकलीफों की वजह से मानसिक रोगियों के समान हमेशा चिंता में मत पड़े रहो। धैर्य रखो, यही मौलिक शक्तिदायक औषधि है, समय से पहले हार मत माना।  लंबा जीवन ही सब कुछ नहीं, यदि तुम और, और जीते रहो तो एक समय आएगा कि तुम प्रभु से प्रार्थना करोगे कि वह तुम्हें उठा ले तथा इस दुख का...

असफलता में ही सफलता निहित होती है : Learn by Mistake in Motivation Story in Hindi

सीमा से परे कृुछ करने में भले पहले नाकामी मिले, लेकिन वह सफलता की ओर बढ़ा कदम होता है। आ में से कितने लोगों ने भारोतोलन प्रतियोगिता देखी है? एक महत्वपूर्ण बात जो आप सभी ने देखी होगी वह यह है कि प्रत्येक भारोत्तोलक अपनी ज्ञात क्षमता से कुछ किलोग्राम अधिक बजन उठाने की कोशिश करता है।  जहां अधिकांश अपनी इस कोशिश में कामयाब हो जाते हैं, वहीं कुछ के हिस्से में नाकामी भी आती है। यह अलग बात है कि इस नाकामी से उन्हें कोई शिकवा नहीं होता।  कारण, उन्हें अपनी क्षमता से परे जाकर प्रयास करने का संतोष अधिक होता है। इसके उलट अधिकांश मामलों में हम अपनी सीमाओं के भीतर काम करते हैं शायद ही हम कभी अपनी सीमा से परे जाकर कुछ करने की कोशिश करते हों।  इस तरह हम अपने आप को एक मानसिक बंधन में जकड़ लेते हैं और मानने लगते हैं कि परंपरागत लक्ष्यों को ही हम हासिल कर सकते हैं। एक लीडर होने के  लीडरशिप मंत्र  नाते जरूरी है कि हम पूर्व निर्धारित लक्ष्य से परे एक अतिरिक्त कदम और उठाएं।   एक बार जब आप अंतिरिक्त कदम उठाएंगे तो आपका सामना किसी न किसी सुखद आश्...

प्रतिबद्ध मन को कुछ नहीं सूझता काम के सिवाय ;- Motivation Story in Hindi

प्रतिबद्धता का भाव आपके पूरे चरित्र को बदलकर रख देगा। आपको अंदर और बाहर से बेहद अनुशासित और व्यवस्थित कर देगा। वार के उन्हीं हिस्सों में कीड़े-मकोड़ों का निवास होता है जहां छेट होते हैं और वहीं से दीवार के गिरने की शुरुआत होती है। जिस जगह बांध सबसे कमजोर होता है, बहीं से पानी रिसता है, जो बाद में बांध टूटने का कारण बनता है। अगर किसी घर में सांप या चूहे को घुसना है, तो वह वहां से घुस पाएगा जहां से घुसने के लिए उसे थोड़ी सी जगह मिल पाएगी।  दीवार पर बन गए एक छेद या बांध के कमजोर हिस्से या मकान में हो गए एक छिद्र की तरह ही प्रतिबद्धता की कमी भी है, जो निश्चित रूप से हमारी अपनी कमजोरी का कारण बनता है। इस कमजोरी के लिए पूरी तरह हम ही जिम्मेदार होते हैं। एक प्रतिबद्ध मन कर्म के सिवाय और कुछ सोचता ही नहीं। वह कर्म से भागने के तरीके तो सोचेगा ही नहीं। यदि वह कुछ सोचेगा भी, तो सिर्फ यही कि कर्म को कैसे और अधिक सरल, अधिक उपयोगी बनाया जाए, ताकि सफलता मिल सके।  प्रतिबद्ध होना सीखिए। बड़ी चीजों के प्रति बाद में, छोटी-छोटी चीजों के प्रति पहले। ये छोटी-छोटी प्रतिबद्धताएं ही ...

समस्या का सामना करने से बनती है बात | Samasya Ka Saamana Karane Se Banatee Hai Baat

समस्याओं से भागने से वे आपसे दूर नहीं होतीं, बल्कि दुगने जोर के साथ वापस आती हैं। मैं जब ग्यारहवीं कक्षा में था, तो मुझे अपनी साइंस की किताब खोलना बिलकुल नहीं सुहाता था और मैं हमेशा अपने पसंदीदा विषय गणित में ही लगा रहता था। मुझे गणित के सवाल करना अच्छा लगता था, पर मैंने साइंस के बारे में कभी ध्यान नहीं दिया। जब परीक्षा नजदीक आई, तो मुझे घबराहट होने लगी और मुझे इस विषय की तैयारी के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी।  आप में से बहुत से लोग भी अपनी नापसंद चीजों और समस्याओं से बचने के लिए ऐसा ही कुछ करते होंगे। जब आप समस्याओं से दूर भागते हैं, तो इसका हांगेज यह मतलब नहीं कि वे भी आपसे दूर हो जाती हैं, बल्कि वे तो वापस आकर और ज्यादा ताकत से आपके दरवाजे पर दस्तक देती हैं। मैं साइंस की पढ़ाई से कतराता था, लेकिन परीक्षाएं करीब आने पर मैंने महसूस किया कि महज नापसंदगी के आधार पर मैं इससे बच नहीं सकता।  हमेशा याद रखें:-  (1) समस्याओं से कभी न भागें। कुछ देर शांति से बैठकर विश्लेषण करें कि ऐसा क्यों हुआ और उन चीजों की सूची बनाएं जिनके जरिये इस पर काबू पाया जा सकता है। ...

ज्यादा सोच- विचार से बढ़ती हैं उलझनें ! Jyaada Soch Vichaar Se Badhatee Hain Ulajhanen

किसी कार्य के बारे में बहुत ज्यादा सोचने से यही बेहतर है कि उंस पर काम शुरू कर दिया जाए। बचपन से मुझे लिखने से चिढ़ थी। इसका कारण यह है कि मेरे लेखन माकरण की काफी गलतियां होती, मेरी तबीयत बहुत खराब है। इस वजह से में लिखने में अपना समय और ऊर्जा बर्बाद क्यों करू, लिखने की अपेक्षा बोलकर अपनी बातों को दूसरों तक पहुंचाना ज्यादा सरल है। काफी समय तक ऐसा ही चलता रहा।  आखिर फरवरी 2007 में मेरे गुरु ने भुझे अपने नेतृत्व संबंधी अनुभवों को कागज पर उतारने के लिए मजबूर किया। मैं इसके लिए हिचक रहा था और मैंने न लिखने के लिए उनसे हजार बहाने बनाए. लेकिन गुरु पीछे पड़ गए और उन्होंने मुझे बचने का कोई मौका नहीं दिया। आखिर मैंने अपने विचारों को लेखनबद्ध करना शुरू किया। मेरे लिए लिखना वाकई कठिन था और अपनी मर्जी के बिरुद्ध यह कार्य करने के कारण मैं अक्सर दिमागी उलझन में फंस जाता, लेकिन धीरे-धीरे सब कुछ ठीक होने लगा और मेरे लेखन में प्रवाह आ गया।    इससे मुझे एक महत्वपूर्ण सबक मिला - किसी कार्य के बारे में बहुत ज्यादा सोचने से वही बेहतर है कि उस पर काम शुरू कर दिया जाए।' सोचना ...

महापुरुष खुद गढ़ते हैं अपना व्यक्तित्व Read in Hindi | Great men create their own personality ! Mahaapurush Khud Gadhate Hain Apana Vyaktitv

मूलत: व्यक्तित्व का संबंध उन गहराइयों से है, जो हमारी चेतना को नियंत्रित करती हैं। और हमारे आचरण में अभिव्यक्त होती हैं। संसार में जितने भी सफल व्यक्ति या महापुरुष हुए हैं, इसलिए नहीं कि वे अलौकिक प्रतिभा के धनी थे अथवा साधन-संपन्न थे, बल्कि इसलिए कि वे महान व्यक्तित्व के स्वामी थे विश्व के महापुरुषों व्यक्तियों की जीवनियां हमें बताती हैं कि सभी ने अपने व्यक्तित्व का विकास कर जीवन को अनुशासित किया और उसे निश्चितृ दिशा तथा गति प्रदान कर ये अपने उद्देश्य तक पहुंचने में सफल हुए। असली विजेता वह है जिसने एक सार्थक जीवन बनाने की कला सीखकर सफल स्थायी सफलता हासिल की है।  मूलतः व्यक्तित्व का संबंध उन गहराइयों से है जो हमारी चेतना को नियंत्रित करती हैं अर्थात जो हर क्षण हमारे व्यवहार, आचरण और हमारे कार्यकलाप जीने की और क्रियाओं (चेप्टाओं) में अभिव्यक्त होती हैं। मनोवैज्ञानिकों का भी यह मानना है कि व्यक्तित्व का संबंध केवल व्यक्ति के बाहा गुणों से नहीं है, उसके आंतरिक गुणों से भी है, जैसे चरित्र-बल, आत्मविश्वास, रुचि, लगन उत्साह, एकाग्रता आदि। यथार्थ में आंतरिक गुणों के विकास से ...

राख के ढेर में भी उम्मीद की किरण Beautiful Story in Hindi with full Meaning

वस्तुत: कठिनाइयों एवं संकटों के माध्यम से ही ईश्वर हमें बढ़ने का अवसर प्रदान करता है। जब कोई व्यक्ति आत्मुग्ध होता है तो वह अपनी उपलब्धि के बारे में गलत अनुमान लगा लेता है। ज्यादातर लोग अच्छे उद्देश्य लेकर चलते हैं और उसके मुताबिक काम करते हैं तो उसका अच्छा ही परिणाम मिलता है। कोई भी व्यक्ति, जो निगशाजनक ढंग से अपने किए का मूल्यांकन करता है, तो उसके अच्छे उद्देश्यों में विरोधाभास पैदा हो जाते हैं। कुछ लोग अपना काम उस ढंग से करते हैं जो उन्हें. सुविधाजनक लगता है और शाम को संतुष्टि की भावना लिए घर चले जाते हैं। वे अपने काम का मूल्यांकन नहीं करते। ऐसा माना जाता है, क्योंकि कोई भी व्यक्ति अपने कार्य को समय के भीतर खत्म करने का इरादा रखता है और अगर इसमें विलंब होता है तो उसके नियंत्रण के बाहर की बात होती है। काम में देरी करने का उसका कोई इरादा नहीं होता, लेकिन अगर उसके काम का तरीका या आलस्य देरो का कारण बनता है. तो क्या यह इरादतन नहीं होता? मेरा युवा दिनों का अच्छा अनुभव रहा है। उन दिनों मेरे भीतर तीव्र इच्छाशक्ति थी। मेरी इच्छा ज्यादा से ज्यादा कुछ अच्छा सीखने की और ज्यादा से ज्य...