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सार्थक जीवन के लिए हृदय को पवित्र बनाए

छोटी-छोटी तकलीफो की वजह से हर चिंता में मत पड़े रहो। धैर्य रखो, यही मौलिक शक्तिदायक औषधि है। जो कुछ तुम खाते हो, जो कुछ तुम देखते हो, कुछ सुनते हो और जो इंद्रियों द्वारा ग्रहण करते वह सब तुम्हारे स्वास्थ्य को प्रभावित करता है बाहरी जगत से तुममें तीन प्रकार की प्रतिक्रियाएं होती हैं तन प्रकार के मनुष्य होते हैं, जिनमें एक प्रतिक्रिया की अपेक्ष दूसरी प्रबल रहती है।  जिस प्रकार रुई जिस चीज में भ इसे डुबोया जाता है उसे वह अपने में सोख लेती है। पत्थर, जिस पर किसी प्रकार का प्रभाव नहीं होता तथा मक्खन, जो दूसरों के संसर्ग में बदलता रहता है, चाहे हल्की ऊष्णता ही क्यों न हो। मक्खन के प्रकार के मनुष्य दूसरों के सुखों या दुखों में सहानुभूति से तत्काल द्रवित हो जाते हैं।  इसलिए मैं कहता हूं कि छोटी-छोटी तकलीफों की वजह से मानसिक रोगियों के समान हमेशा चिंता में मत पड़े रहो। धैर्य रखो, यही मौलिक शक्तिदायक औषधि है, समय से पहले हार मत माना।  लंबा जीवन ही सब कुछ नहीं, यदि तुम और, और जीते रहो तो एक समय आएगा कि तुम प्रभु से प्रार्थना करोगे कि वह तुम्हें उठा ले तथा इस दुख का...

कर भला, हो भला A Beautiful Hindi Story with Real Story

एक छोटे-से शहर में, एक छोटा-सा बच्चा दरवाजे- दरवाजे भटकता, कुछ छोटी-मोटी चीज़ं बेचता था, ताकि वह अपनी पडाई जारी रख सके। एक दिन भरी दोपहर में चलते-चलते वह चककर निदाल हो गया। उस दिन उसका सामान भी न बिका था उसे इतनी जार का भूख लग आई थी कि एक कदम और चलना दूभर था। उसने जैव में हाय डाला, तो पाया कि जेब में मात्र एक दस पैसे का सिक्का था, जिसर कुछ भी खरीद पाना मुमकिन न था। भूख के हावो लाचार यालक ने सोचा कि अगर जीना है, तो अगते घर से रोटी मांगकर खाना होगा। इसी निर्णय के साथ वह थोड़ा साहस जुटाकर आगे बदा एक घर के आगे रुका और इसी इरादे के साथ दरवाजे पर दस्तक दी। एक भद्र महिला ने दरवाज़ा खोला और सवाल किया- 'बोलो वेटा ।"  महिला को सामने देखकर इतनी देर से भूख से जुझ रहे बालक का आत्म सम्मान जागृत हो उठा। उसने रोटी मंगिने की वजाय सिर्फ एक गिलास पानी मांग लिया। उस महिला ने बह़े प्यार से बालक को बिठाया और अंदर चली गई। बालक की उस निदाल हालत को देखकर महिला ने अंदर से पानी के स्थान पर एक बडे गिलास में दूध लाकर उस मासूम बच्चे को धमा दिया। चकित बालक ने पहले तो उस दयालु महिला का चेहरा देखा औ...

अपनी क्षमता तक पहुंचने की उन्हें शक्ति दें

जिन्हें आप सशक्त बनाना चाहते हैं, शुरुआत में उन्हें आसान काम दें और धीरे- धीरे जिम्मेदारियां व अधिकार बढ़ाएं। जत्र आपको खुद पर और उन लोगों पर विश्वास हो जाता है, जिन्हें आप सशक्त बनाना चाहते हैं, तो आपका लक्ष्य यह होना चाहिए कि शुरुआत में आप उन्हें तुलनात्मक रूप से छोटे व आसान काम दें और धीरे-धीरे उनकी जिम्मेदारियां तथा अधिकार बढ़ाएं। आप जिन लोगों के साथ काम कर रहे हैं, वे जितने अनुभवहीन होंगे, इस प्रक्रिया में उतना ही अधिक समय लगेगा।  लोगों को सशबत बनाते समय मार्गदर्शन के लिए जरूरी है :  1. उनका मूल्यांकन फरें लोगों को सशक्त बनाने की प्रक्रिया उनके मूल्यांकन से शुरू होनी चाहिए। अगर आप अनुभवहीन-लोगों को बहुत जल्दी बहुत ज्यादा अधिकार दे देते हैं, तो वे असफल हो सकते हैं। अगर आप बहुत अनुभवी लोगों के साथ बहुत धीमे चलते लीडरशिप मंत्र जिम डॉरनैन हैं, तो वे कुंठित और हतोत्साहित हो सकते हैं। कई बार जब लोडर्स दूसरों की क्षमताओं का गलत मूल्यांकन करते हैं, तो परिणाम हास्यास्पद हो सकते हैं।  2. उनके आदर्श बने- ज्ञान, योग्यता और इच्छा से संपन्न लोगों को भी यह जानने...

गलतियां से सीखकर सुधरता है मनुष्य - Man learns from mistakes and improves Beautiful Story in Hindi

गलतियां हमें स्वयं को सुधारने का अवसर प्रदान करती है। इन्हें टाला नहीं जा सकता, इन पर नियंत्रण किया जा सकता है। बात सन 1955 की है प्रो. सारभाई धुंबा के दौरे पर आए। उनको नोज-कॉन जेटेसनिंग मैकेनिज्य (रॉकेट के आपभाग को शेष आाचे से नियंत्रि विसमोट करके अलग करने को प्रणाली) का संचालन करके दिखाया जाना था। हमने प्रो. साराभाई से अनयोध किया कि वे औपचारिक रूप से इस तापीय प्रणाल्ती को टाइमर के माध्यम से शुरू करें। प्रो. साराभाई मुस्कुराए और कटन दया दिया लेकिन शुरू नहीं हुई। हम सब अवाक रह गए। मैने प्रनोद काले की वरफ देखा, जिसने टडमर, सरकिट को डिजाइन किया था। इस सब इ असफलता के कारणों का विश्लेषण करने में लग गए किर हमने टनर ुक्ति को हटाकर तापोय प्रणालो को सोधे हो सकिट से जोड़ दिया।   प्रो. साराभाई ने दोबारा कटन दबाया और तापीच प्रणाली शुरू हो गई। साराधाई ने हमें बधाई दे। इस्के चात प्रो. साराभाई के सचिव ने मुझे फोन कर रात के खाने के बाद उनसे मिल लेने को कह मैं थोड़ा घकायाः साराभाई ने मुझे गर्मजोशी के साथ दधाई दी। उसके बाद के उस घहना पर आए, जो उस दिन रुवह घाटेल हुई थी। प्रो. साराभा...