एक छोटे-से शहर में, एक छोटा-सा बच्चा दरवाजे- दरवाजे भटकता, कुछ छोटी-मोटी चीज़ं बेचता था, ताकि वह अपनी पडाई जारी रख सके। एक दिन भरी दोपहर में चलते-चलते वह चककर निदाल हो गया। उस दिन उसका सामान भी न बिका था उसे इतनी जार का भूख लग आई थी कि एक कदम और चलना दूभर था। उसने जैव में हाय डाला, तो पाया कि जेब में मात्र एक दस पैसे का सिक्का था, जिसर कुछ भी खरीद पाना मुमकिन न था। भूख के हावो लाचार यालक ने सोचा कि अगर जीना है, तो अगते घर से रोटी मांगकर खाना होगा। इसी निर्णय के साथ वह थोड़ा साहस जुटाकर आगे बदा एक घर के आगे रुका और इसी इरादे के साथ दरवाजे पर दस्तक दी। एक भद्र महिला ने दरवाज़ा खोला और सवाल किया- 'बोलो वेटा ।" महिला को सामने देखकर इतनी देर से भूख से जुझ रहे बालक का आत्म सम्मान जागृत हो उठा। उसने रोटी मंगिने की वजाय सिर्फ एक गिलास पानी मांग लिया। उस महिला ने बह़े प्यार से बालक को बिठाया और अंदर चली गई। बालक की उस निदाल हालत को देखकर महिला ने अंदर से पानी के स्थान पर एक बडे गिलास में दूध लाकर उस मासूम बच्चे को धमा दिया। चकित बालक ने पहले तो उस दयालु महिला का चेहरा देखा औ...
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